भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन एक महत्वपूर्ण चुनौती सामने आई है: इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) का लगभग मौन संचालन, जो पैदल यात्रियों और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए खतरा बन सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक नया सुरक्षा नियम पेश किया है, जिसके तहत सभी इलेक्ट्रिक वाहनों में अकústिक व्हीकल अलर्टिंग सिस्टम (AVAS) स्थापित करना अनिवार्य होगा। यह प्रणाली वाहन को कम गति पर आवाज निकालने में सक्षम बनाती है, जिससे आसपास के लोग वाहन की उपस्थिति का पता लगा सकें और दुर्घटनाओं से बच सकें।
यह नियम भारत के वाहन सुरक्षा ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव है और वैश्विक प्रथाओं के अनुरूप है, जो शहरी यातायात में शांत EVs के सुरक्षित परिचालन को सुनिश्चित करते हैं। इस मसौदा अधिसूचना को सार्वजनिक किया गया है और इसे जल्द ही अंतिम रूप दिया जाने की संभावना है।
AVAS क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों है?
अकústिक व्हीकल अलर्टिंग सिस्टम (AVAS) एक तकनीक है जो वाहन को कम गति पर चलने पर, या पीछे हटने पर, बाहरी ध्वनि उत्पन्न करने की अनुमति देती है। यह प्रणाली बाहरी स्पीकर के माध्यम से आवाज पैदा करती है, जो वाहन की गति के अनुसार बदलती है और पारंपरिक इंजन की आवाज़ जैसा प्रभाव देती है।
AVAS की आवश्यकता
कम गति पर इलेक्ट्रिक वाहन लगभग शांत होते हैं, खासकर शहरी क्षेत्रों में। जबकि यह शोर प्रदूषण कम करता है, मौन वाहन पैदल यात्रियों, साइकिल सवारों और दृष्टिहीन लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है। विशेष रूप से:
पैदल यात्री
साइकिल और दोपहिया सवार
दृष्टिहीन लोग
बच्चे और बुजुर्ग
AVAS इन सुरक्षा चिंताओं को कम करता है और सुनिश्चित करता है कि EVs सुनाई देने लगें, जिससे सड़क पर सभी उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा बढ़े।
समयरेखा और कार्यान्वयन विवरण
MoRTH ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (CMVR) में संशोधन करते हुए AVAS के लिए चरणबद्ध अनुपालन समयरेखा निर्धारित की है। ये समयसीमाएँ विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रिक वाहनों और उनके उत्पादन या लॉन्च के आधार पर लागू होती हैं।
| अनुपालन श्रेणी | अनिवार्यता | समयसीमा |
|---|---|---|
| नए EV मॉडल | निर्माण के समय AVAS स्थापित करना अनिवार्य | 1 अक्टूबर 2026 से |
| मौजूदा EV मॉडल | उत्पादन में AVAS स्थापित करना अनिवार्य | 1 अक्टूबर 2027 तक |
| कवर किए गए वाहन श्रेणी | यात्री EV (M श्रेणी), माल EV (N श्रेणी), ई-रिक्शा/ई-कार्ट (L5/L7) | 2026–2027 के अनुसार लागू |
इस नियम में केवल कार और भारी वाहन ही शामिल नहीं हैं; नए संशोधनों के अनुसार लघु इलेक्ट्रिक वाहन जैसे ई-रिक्शा और ई-कार्ट भी इस अनिवार्यता में आएंगे।
AVAS कैसे काम करता है: तकनीकी विवरण
AVAS प्रणाली में मुख्यतः निम्नलिखित घटक होते हैं:
बाहरी साउंड मॉड्यूल: वाहन के शरीर या चेसिस पर लगे स्पीकर
कंट्रोल यूनिट: वाहन की गति सेंसर और पॉवरट्रेन कंट्रोल के साथ इंटीग्रेटेड
ध्वनि मानक: AIS‑173 जैसे मानक तय करते हैं कि आवाज़ कितनी तेज और किस फ्रिक्वेंसी रेंज में होगी
AVAS वाहन को कम गति पर चलाते समय या पीछे हटाते समय सक्रिय होता है और उच्च गति पर स्वतः बंद हो जाता है, क्योंकि उस समय टायर और हवा की आवाज पर्याप्त होती है।
कौन से वाहन इस नियम के तहत आते हैं?
AVAS अनिवार्यता व्यापक श्रेणी के इलेक्ट्रिक वाहनों पर लागू होती है:
1. यात्री और वाणिज्यिक EVs
इलेक्ट्रिक कार
इलेक्ट्रिक बस
इलेक्ट्रिक ट्रक और माल वाहन
2. लघु इलेक्ट्रिक वाहन
ई-रिक्शा
ई-कार्ट (L5/L7 श्रेणी)
इसी तरह की कम गति वाली EV श्रेणियाँ
सरकार का उद्देश्य और सुरक्षा प्रभाव
AVAS नियम का उद्देश्य है:
शहरी क्षेत्रों में पैदल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना
कम गति पर EVs की आवाज़ सुनिश्चित करना
भारत की EV सुरक्षा मानकों को वैश्विक स्तर के अनुरूप बनाना
अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान में पहले से ही ऐसे नियम लागू हैं। भारत में यह कदम वैश्विक सुरक्षा मानकों के अनुरूप EV सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
उद्योग और EV अपनाने पर प्रभाव
सकारात्मक प्रभाव:
पैदल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी
EV सुरक्षा मानक मानकीकृत होंगे
जनता का EV में विश्वास बढ़ेगा
वैश्विक EV मानकों के अनुरूप
संक्रमणकालीन चुनौती:
OEMs के लिए डिजाइन और इंटीग्रेशन की लागत
परीक्षण और प्रमाणीकरण की अतिरिक्त जिम्मेदारी
मौजूदा मॉडल को समयसीमा के भीतर अपडेट करना
AVAS का समयरेखा सारांश
| तारीख | घटना |
|---|---|
| 29 सितंबर 2025 | केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन का मसौदा अधिसूचना प्रकाशित |
| 1 अक्टूबर 2026 | नए EV मॉडल में AVAS अनिवार्य |
| 1 अक्टूबर 2027 | मौजूदा EV मॉडल में AVAS अनिवार्य |
निष्कर्ष: सुरक्षित सड़कें सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
MoRTH का AVAS अनिवार्यता नियम भारत में इलेक्ट्रिक वाहन सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। जैसे-जैसे EVs की संख्या बढ़ रही है, पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य हो गया है। नए और मौजूदा वाहनों के लिए चरणबद्ध समयसीमा — 1 अक्टूबर 2026 और 1 अक्टूबर 2027 — निर्माताओं को आवश्यक बदलाव करने का समय देती है और भारतीय सड़क सुरक्षा मानकों को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करती है।
यह नियम न केवल सुरक्षित इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देता है, बल्कि दिखाता है कि तकनीक के साथ नीति निर्माण कैसे सड़क सुरक्षा में सुधार ला सकता है।
Note:- Image used is AI generated.
